किस तरह का पेट्रोल या डीजल हमें डलवाना चाहिए ? पेट्रोल संचालकों के धोखाधड़ी से कैसे बच सकते हैं ? : What kind of petrol or diesel should us? How can survive the fraud of petrol operators ?

किस तरह का पेट्रोल या डीजल हमें डलवाना चाहिए ? पेट्रोल संचालकों के धोखाधड़ी से कैसे बच सकते हैं ?

किस तरह का पेट्रोल या डीजल हमें डलवाना चाहिए ? पेट्रोल संचालकों के धोखाधड़ी से कैसे बच सकते हैं ? : What kind of petrol or diesel should us? How can survive the fraud of petrol operators ?
show density in machine

आप किसी भी पेट्रोल पंप में पेट्रोल या डीजल डलवाने हैं जाते मैं तो एक बात का जरूर ध्यान रखें ! वह है उस पेट्रोल या डीजल की डेंसिटी,,,! क्योंकि डेंसिटी से ही उसकी शुद्धता का सही पहचान किया जा सकता है ।

नीचे दिए गए प्रश्न उत्तरो के मदद से आप डेंसिटी को समझ सकते हैं तथा उससे संबंधित अन्य दूसरी शंकाएं भी दूर कर सकते हैं -

● डेंसिटी ( density ) क्या है ?

कोई भी चीज कितनी सघन है यानी उसकी आणविक संरचना आपस में कितनी मात्रा में जुड़े हुए हैं उसे उस चीज का घनत्व यानी डेंसिटी कहते हैं , यह जितनी अधिक सघनता से आपस में जुड़े होंगे उस पदार्थ की डेंसिटी उतनी अधिक होगी और यह जितनी कम होगी उसकी डेंसिटी उतनी कम होगी ।

● पेट्रोल या डीजल की सही डेंसिटी कितनी होनी चाहिए ?

- इंडिया के लिए पेट्रोल की डेंसिटी रेंज 720 - 775 kg/m3 के अंदर होनी चाहिए ।

- और डीजल के लिए डेंसिटी रेंज 820 - 860 kg/m3 होनी चाहिए ।

● पेट्रोल या डीजल का स्टैंडर्ड ( क्वालिटी ) कौन तय करता है ?

भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ( Ministry of Petroleum and Natural gas ) के द्वारा पेट्रोलियम उत्पादों का मानक स्तर तय किया जाता है ।

● डेंसिटी चेक का नियम क्यों लाना पड़ा ? 

मिलावट को रोकने के लिए डेंसिटी चेक कर नियम लाना पड़ा । पेट्रोल पंपों के संचालकों द्वारा अपने फायदे के लिए पेट्रोल या डीजल मे अन्य प्रकार के तेलो को मिलाकर बेचा जाता है जिससे समान उपभोक्ता को अपने पैसे का सही वैल्यू नहीं मिल पाता तथा मिलावटी तेलों के उपयोग से गाड़ियों के परफॉर्मेंस में भी काफी कमी आ जाती है । इसलिए डेंसिटी चेक का नियम लाना जरूरी हो गया ।

● पेट्रोल व डीजल की डेंसिटी कैसे चेक कर सकते हैं ?

पेट्रोल या डीजल के डेंसिटी चेक करने के लिए लिए गए पेट्रोल या डीजल के सैंपल को एक जार में रखा जाता है इसके बाद इसमें एक थर्मामीटर और एक हाइड्रोमीटर को डाला जाता है थर्मामीटर से हमें उस फ्यूल की टेंपरेचर पता चलता है और हाइड्रोमीटर से उस फ्यूल की डेंसिटी पता चल जाती है ।

इस टेंपरेचर और डेंसिटी को एक चार्ट जिसे ASTM ( American Society for Testing of Materials ) कन्वर्जन चार्ट भी कहते हैं , उसमें मिलाया जाता है । अगर यह डेंसिटी और टेंपरेचर बताए गए मानक डेंसिटी और टेंपरेचर स्तर से मैच करता है तो फ्यूल की गुणवत्ता अच्छी मानी जाती है ।

● क्या पेट्रोल डिस्पेंसर मशीन में दिखाए गए पेट्रोल या डीजल डेंसिटी ऑटोमेटिक सेट हो जाता है ?

' नही ' यह काम ऑटोमेटिक संभव नहीं है इससे पेट्रोल पंप के संचालकों द्वारा खुद ही सेट किया जाता है ।

● मानक स्तर से कम या ज्यादा डेंसिटी वाले पेट्रोल या डीजल को अपने गाड़ी में डलवाना सही है या नही ?

ऐसा करना बिल्कुल भी सही नहीं होगा क्योंकि डेंसिटी से ही फ्यूल के गुणवत्ता का पता चलता है और अगर यह डेंसिटी, डेंसिटी मानक स्तर से ऊपर या नीचे होगा तो यह आपके वाहन के लिए अच्छा नहीं होगा । इससे आपकी वाहन की परफॉर्मेंस खराब हो सकती है ।

● अलग-अलग पेट्रोल पंपों में डेंसिटी का स्तर अलग-अलग क्यों होता है ?

जब पेट्रोल या डीजल का निर्माण किया जाता है जो इसे अलग-अलग बैचेस में निर्माण किया जाता है तथा अलग-अलग बैचेस में निर्माण के साथ डेंसिटी का मान भी अलग-अलग हो जाता है यह अंतर ऊपर नीचे होता रहता है परंतु इसे सरकार द्वारा तय किए गए डेंसिटी मानक स्तर के बीच ही रखा जाता है ।


image credit - Joegoauk Goa

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