AC करंट और DC करंट क्या है ? इनमें क्या - क्या अंतर होते हैं ? सबसे ज्यादा खतरनाक कौन है ?

AC करंट और DC करंट क्या है ? इनमें क्या - क्या अंतर होते हैं ? सबसे ज्यादा खतरनाक कौन है ?

( 1 ) DC current, ( 2 ) AC current
( 1 ) DC current, ( 2 ) AC current

बिजली का इस्तेमाल तो हम सभी करते हैं । बिजली से हम हमारे घर के सभी उपकरण को चला पाते हैं । ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि आज बिजली ही मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ी जरूरत बन गई है । आज हमारे जीवन में बिजली ना हो तो हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते । पर दोस्तों क्या आपको मालूम है कि यह बिजली भी दो प्रकार की होती है - AC Current ( प्रत्यावर्ती धारा ) और DC Current ( दिष्ट धारा )

अब हमारे मन में यह प्रश्न उठता है कि यह AC करंट और DC करंट क्या है । आइए समझते हैं -

दोस्तों AC करंट का निर्माण हमेशा Alternater की मदद से किया जाता है । जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है Alternative Current ( AC ) । अल्टरनेटर एक घूमने वाला यंत्र होता है, इसी के घूमने से AC करंट का निर्माण होता है । बड़े-बड़े बिजली घरों में टरबाइनो की मदद से इसी अल्टरनेटर को चलाया जाता है ताकि बिजली का निर्माण हो सके । इसके विपरीत अगर हम DC करंट की बात करें तो DC करंट डायनेमो द्वारा प्राप्त किया जाता है ।

■ आइए दोस्तों अब हम AC और DC करंट के बेसिक अंतर के बारे में समझते हैं - 

● AC करंट की बात करें तो AC करंट की दिशा और मान समय के साथ बदलता रहता है जबकि DC करंट का मान और दिशा हमेशा एक समान रहता है ।

● इसके अलावा अगर हम इसके उपयोग की बात करें AC करंट का उपयोग हम हमारे घर के सामान्य उपकरणों जैसे - फ्रिज, कूलर, पंखा, टीवी जैसे उपकरणों को चलाने में किया जाता है । जबकि DC करंट का उपयोग अधिकतर मोबाइल फोन की बैटरीयों, वेल्डिंग मशीन, इलेक्ट्रो प्लेटिंग जैसे कार्यो में करते हैं ।

● AC करंट का उत्पादन 33000v वोल्ट से ज्यादा नहीं किया जाता । जबकि DC करंट का उत्पादन 650v वोल्ट से ज्यादा नहीं किया जाता ।

● AC करंट को अगर DC करंट में बदलना है तो हम हमेशा डायोड ( रेक्टिफायर सर्किट ) का उपयोग करते हैं । इसके विपरीत अगर हम DC को AC में कन्वर्ट करना चाहते हैं तो हम इनवर्टर का प्रयोग करते हैं ।

■ तो दोस्तों यह थे AC और DC करंट के कुछ बेसिक अंतर । आइए अब जानते हैं इंटरनल लेवल पर AC और DC करंट में क्या - क्या अंतर होता है ।

● पहला और सबसे बड़ा अंतर यह है कि AC करंट में हमेशा फेस ( P ) और न्यूटन ( N ) देखने को मिलता है जबकि DC करंट में प्लस ( + ) और माइनस ( - ) देखने को मिलेगा । इसके अलावा AC करंट में हमेशा 3 फ़ेजो का इस्तेमाल किया जाता है ।

● AC करंट हमेशा फ्रिकवेंसी पर काम करती है जबकि डीसी करंट में कोई फ्रिकवेंसी नहीं होती । फ्रीक्वेंसी हमेशा Hz में अकाउंट की जाती है । इसके साथ ही साथ हम आपको यह बता दें कि हमारे भारत में AC करंट की फ्रीक्वेंसी 50Hz है ।

आइए फ्रीक्वेंसी को समझते हैं -

फ्रीक्वेंसी का सीधा कनेक्शन AC करंट में उसकी साइकिल से होता है यानी कि करंट 1 मिनट में कितनी बार ऊपर - नीचे करते हुए गति करता है । जैसा कि हमने ऊपर जाना कि हमारे भारत में AC करंट की फ्रीक्वेंसी 50Hz है यानी कि यह करंट 1 मिनट में 50 बार ऊपर - नीचे गति करते हुए आगे की ओर बढ़ता है । नीचे दिए गए हैं इमेज के माध्यम से आप समझ सकते हैं ।

1 cycle of AC current in red box
1 cycle of AC current in red box

अगर आप इस फ्रीक्वेंसी को जाने के लिए प्रैक्टिकल करना चाहते हैं तो आप VFD ( Variable Frequency Drive ) की मदद से आसानी से कर सकते हैं उसके लिए आप किसी बल्ब को VFD से कनेक्ट कर दें । उसके बाद अपने जरूरत के हिसाब से फ्रीक्वेंसी को सेट कर दें । 

जैसे कि उदाहरण के लिए मान लिया कि आपने फ्रीक्वेंसी को 10 पर सेट किया है तो आप देखेंगे कि बल्ब 1 मिनट में 10 बार बंद होता है और 10 बार चालू होता है । इसके माध्यम से हम यह समझ सकते हैं कि हमारे घर में जो करंट आ रही है उसमें फ्रीक्वेंसी मौजूद है , यानी कि यह अल्टरनेटिंग करंट है ।

● हम एक और बड़े अंतर की बात करें तो वह है पावर फैक्टर । 

दोस्तों आप पावर फैक्टर उपयोग हमेशा AC करंट मे ही करते हैं । जैसा कि हम जानते हैं कि करंट में वोल्टेज और एंपियर ( current ) दोनों मौजूद रहते हैं तथा यह एक साथ एक ही फ्रिकवेंसी में आगे बढ़ते हैं । 

परंतु जब हम कभी किसी AC सप्लाई में कोई इंडक्टिव लोड जैसे कि कोई मोटर चलाते हैं तो ऐसे में वोल्टेज और एंपियर दोनों का संतुलन बिगड़ जाता है । जिसे हमेशा साथ चलना चाहिए था वह इंडक्टिव लोड के कारण आगे पीछे हो जाते हैं और इसी डिस्टरबेंस के कारण दोनों में आई दूरी के मान को ही पावर फैक्टर कहते हैं । 

ac power power factor
power factor

पावर फैक्टर की गणना करने के लिए हम हमेशा पावर फैक्टर को कुछ नंबर में दर्शाते हैं जैसे कि - 0.6, 0.7, 0.8, 0.9 इत्यादि । परंतु एक सही और मानक पावर फैक्टर का मान 1 होता है तथा हम इसी मानक मान को प्राप्त करने के लिए हम अपने पावर इंडस्ट्रीज में कैपेसिटर का उपयोग करते हैं । वैसे पावर इंडस्ट्रीज में समान्यतः पावर फैक्टर का मान 0.8 के आसपास रहता है । 

इसके विपरीत DC करंट में पावर फैक्टर का मान 1 होता है । इसके लिए हमें किसी प्रकार की कोई कैपेसिटर की आवश्यकता नहीं होती । ( दोस्तों पावर फैक्टर के विषय में वैसे तो और बहुत सारी बातें हैं जिसे हम किसी और पोस्ट में विस्तार पूर्वक बात करेंगे फिलहाल अभी आप यह समझ लें कि AC करंट में पावर फैक्टर बदलता रहता है और DC करंट में पावर फैक्टर निरंतर एक जैसा होता है ) 

■ यह तो हो गया करंट और उसके अंतर की बात । आइए अब जानते हैं कि AC करंट और DC करंट में सबसे खतरनाक कौन है ?

AC हो या DC जान तो यह दोनों करंट ले सकते हैं पर अगर हम बात करें कि इन दोनों में सबसे खतरनाक कौन है तो AC करंट सबसे ज्यादा खतरनाक होता है । कैसे चलिए कुछ पॉइंट के मदद से समझने की कोशिश करते हैं ।

● दोस्तों से जैसा कि हम जान चुके हैं कि इसी करंट में फ्रीक्वेंसी होता है और यही फ्रीक्वेंसी इसे खतरनाक बनाती है । जैसा कि हमें पता है कि हमारे भारत में फ्रीक्वेंसी 50Hz है इसका मतलब यह हुआ कि करंट 1 मिनट में 50 बार ऊपर - नीचे करता हुआ गति करेगा । जहां यह गति करने के दौरान हर साइकिल में एक पॉइंट पर करंट का वैल्यू 0 होता है । ( नीचे का इमेज देखें )

current value 0 in red circle
current value 0 in red circle 

इस तरह हम देखें तो अगर कोई व्यक्ति है किसी AC करंट सप्लाई के संपर्क में आ जाता है तो ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति को 1 मिनट में सौ बार करंट लग रहा होगा । जबकि DC सप्लाई में करंट में फ्रीक्वेंसी नहीं होता है अतः जब कभी कोई व्यक्ति DC करंट सप्लाई के संपर्क में आता है तो उसे एक कांस्टेंट वे ( बिना रुके ) में करंट लगता है । 

अगर हम इसके नतीजे की बात करें तो वह व्यक्ति जिसने AC करंट सप्लाई को छू लिया होगा उसके हाथों के साथ शरीर के अन्य पार्ट्स भी गंभीर रूप से जख्मी हो सकते हैं, जबकि DC करंट सप्लाई में अधिकत्तर उसी पार्ट या अंग को ज्यादा नुकसान होता है जिसके संपर्क में करंट आया हो ।

● एसी करंट के खतरनाक होने की एक वजह RMS वैल्यू भी है । RMS के बारे में आप अभी सिर्फ इतना समझ लीजिए की अगर मान लीजिए आपके घर में 220 वोल्ट का एसी करंट सप्लाई है तो RMS के हिसाब से यह 220 वोल्ट हर समय 220 वोल्ट नहीं रहता , कभी-कभी इसका वोल्ट हाई हो जाता है जैसे 220v का 310v ( RMS के विषय में हम किसी और पोस्ट में विस्तार पूर्वक बात करेंगे ) । 

इससे आप यह समझ सकते हैं कि AC करंट चिपका हुआ व्यक्ति को हर समय एक जैसा वोल्टेज नहीं लग रहा होता बल्कि कभी-कभी हाई वोल्टेज भी लग रहा होता है । इसी कारण AC करंट ज्यादा खतरनाक हो जाता है ।

■ यह तो हमने समझ लिया कि AC करंट और DC करंट में सबसे खतरनाक कौन है । अब यह जानते हैं कि AC वायर और DC वायर में क्या अंतर है ?

red and black dc wires bundles
DC wires

दोस्तों हम AC और DC की बनावट के बारे में बात करें तो इनमे में कोई खास अंतर नहीं होता । और ऐसा भी नहीं है कि हम AC वायर को DC वायर की जगह उपयोग नहीं कर सकते । फिर भी इनमें कुछ ना कुछ अंतर तो होता ही है । आज हम यही जानेंगे कि इनमें आखिरकार कौन-कौन से मुख्य अंतर हैं जो इनको एक दूसरे से भिन्न बनाते हैं ।

● पहला है इंसुलेशन -

दोस्तों अगर हम DC वायर की बनावट के बारे में बात करें तो इनमें AC वायर की तुलना में इंसुलेशन के लिए एक एक्स्ट्रा कोटिंग लगी होती है ।

● दूसरा है कंडक्टर -

वायर के अंदर पतले - पतले कॉपर के तार को ही हम कंडक्टर या सुचालक कहते हैं । AC वायर के कंडक्टर तांबे के होते हैं जिसे आप देखकर पहचान सकते हैं । इसके विपरीत DC वायर के कंडक्टर भी तांबे के ही बनाए जाते हैं परंतु यह देखने में एलमुनियम जैसे दिखाई पड़ते हैं । ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें ज़िंक एक एक्स्ट्रा कोटिंग की जाती है जो इसको जंक प्रूफ बनाती है । इसके अलावा DC वायर के कंडक्टर ( तांबे के तार ) AC वायर के कंडक्टर से भी बहुत पतले - पतले होते हैं और इनकी संख्या भी ज्यादा होती है ।

● इसके साथ ही इसमें UV प्रोटक्शन कोटिंग भी होती है । यह इसलिए की जाती है क्योंकि DC वायर का उपयोग अधिकतर आउटडोर यानी घर से बाहर किया जाता है । जैसे कि सोलर पैनल वगैरह में DC वायर का ही उपयोग किया जाता है क्योकि इन्हें हमेशा धूप में ही रखना पड़ता हैं और यही एक्स्ट्रा प्रोटेक्शन लेयर इन्हें धूप के साथ-साथ अन्य पर्यावरणीय उतार-चढ़ाव से भी सुरक्षित करता है ।


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