डीजल इंजन का टॉर्क ( Torque ) पेट्रोल इंजन के मुकाबले ज्यादा क्यों होता है ?

डीजल इंजन का टॉर्क ( Torque ) पेट्रोल इंजन के मुकाबले ज्यादा क्यों होता है ?

Why is the Diesel Engine Torque (Torque) more than the petrol engine?डीजल इंजन का टॉर्क ( Torque ) पेट्रोल इंजन के मुकाबले ज्यादा क्यों होता है ?

दोस्तों एक चीज तो हम सभी जानते हैं कि अधिकतम छोटी कारों या पैसेंजर व्हीक्लो मे पेट्रोल इंजनों का उपयोग किया जाता है । वहीं अगर हम दूसरी तरफ देखे तो जितने भी बड़े वाहन जैसे ट्रक, बसेस इत्यादि जो ज्यादा वजन उठाने के लिए उपयोग में लिया जाता है उसमें हमेशा डीजल इंजन का ही उपयोग किया जाता है।

हम जानते हैं कि डीजल इंजन का टॉर्क रेट पेट्रोल इंजन के मुकाबले कहीं ज्यादा होता है । पर क्या दोस्तों आप यह जानते हैं कि डीजल इंजन का टॉर्क ज्यादा क्यों होता है ? दोस्तों डीजल इंजन का टॉर्क ज्यादा होने के कुछ मुख्य वजह है जिसकी वजह से डीजल इंजन में टॉर्क फोर्स ज्यादा होता है । आइए हम बारी - बारी से इन्हें समझने की कोशिश करते हैं ।

इसकी मुख्य वजहों को समझने से पहले आइए सबसे पहले हम टॉर्क को समझते हैं कि आखिर यह टॉर्क है क्या ?

दोस्तों टॉर्क ट्विस्टिंग फोर्स ( Twisting Force ) है यानी कि घुमाने वाली फोर्स । आप यह जानते हैं कि कोई भी इंजन के अंदर पिस्टन होता है जो कि इंजन के अंदर ही ऊपर - नीचे होते हुए लगातार चलता है और इस पिस्टन के गति के कारण ही पिस्टन से लगा क्रेंक सॉफ्ट का घुमाव संभव हो पाता है । 

"और यही काम आता है हमारा टॉर्क" टॉर्क पिस्टन के ऊपर प्रेशर उत्पन्न कर पिस्टन को ऊपर - नीचे चलने में मदद करता है । अतः जितना ज्यादा प्रेशर होगा उतनी ताकत के साथ क्रेनसॉफ्ट घूमेगा और उतनी ही ज्यादा पावर प्रोड्यूस होगी ।

आइए अब देखते हैं डीजल इंजनों में टॉर्क ज्यादा क्यों होता है ?

1. Compression ratio - 

डीजल इंजन का कंप्रेशन रेशों पैट्रोल इंजन के मुकाबले कहीं ज्यादा होता है । जहां पेट्रोल इंजन का कंप्रेशन रेशों 10:1 से 14:1 होता है, वहीं डीजल इंजन का कंप्रेशन रेशों 18:1 से 23:1  होता है । 

इसके साथ ही डीजल इंजन में लगे सिलेंडर की लंबाई पेट्रोल इंजनों के मुकाबले ज्यादा होती है यानी पिस्टन को ऊपर - नीचे मूव करने के लिए ज्यादा डिस्टेंस कवर करना पड़ता है । इसी डिस्टेंस के कारण हमें टॉर्क ज्यादा देखने को मिलता है ।

Why is the Diesel Engine Torque (Torque) more than the petrol engine?डीजल इंजन का टॉर्क ( Torque ) पेट्रोल इंजन के मुकाबले ज्यादा क्यों होता है ?

टॉर्क निकालने का एक सिंपल सा फार्मूला यह है कि जब हम पिस्टन पर लगने वाली फोर्स ( force ) को पिस्टन द्वारा तय की गई डिस्टेंस ( distance ) से गुणा करते हैं तो हमें उस मौजूदा इंजन का टॉर्क ( torque ) मालूम हो जाता है ।

  • Torque = Force × Distance

2. Calorific value - 

ज्यादा टॉर्क के लिए इसके लिए सबसे जरूरी है कि जब फ्यूल का कंबशन हो तो कंबशन के कारण पिस्टन पर लगने वाला प्रेशर ज्यादा हो । डीजल का कैलोरीफिक वैल्यू 45500 Kj/Kg ( किलो जूल प्रति किलो ग्राम ) वही पेट्रोल कैलोरीफिक वैल्यू 45800 Kj / Kg होता है । 

यानी कि डीजल का कैलोरीफिक वैल्यू पेट्रोल के कैलोरीफिक वैल्यू से कम होता है इस कारण यह हिट को ज्यादा स्टोर कर पाता है । दूसरी तरफ डीजल पेट्रोल के मुकाबले 15% ज्यादा डेंस होता है यानी इसका घनत्व ज्यादा होता है । इसीलिए जब डीजल जलता है तो ज्यादा एनर्जी प्रोड्यूस करता है और इससे पिस्टन के ऊपर ज्यादा प्रेशर लगता है और इसी के कारण क्रेंकसोफ्ट का ज्यादा फोर्स के साथ रोटेशन संभव हो पाता है ।

3. Turbo charger - 

Why is the Diesel Engine Torque (Torque) more than the petrol engine?डीजल इंजन का टॉर्क ( Torque ) पेट्रोल इंजन के मुकाबले ज्यादा क्यों होता है ?

पेट्रोल इंजन का हॉर्स पावर ( BHP ) और स्पीड डीजल इंजन के मुकाबले ज्यादा होता है और इसी कमी को दूर करने के लिए डीजल इंजनों में टर्बो चार्जर का उपयोग किया जाता है । टर्बो चार्जर के उपयोग करने से फायदा यह होता है कि पावर स्ट्रोक के टाइम पिस्टन पर लगने वाला प्रेशर बढ़ जाता है और इसी कारण हमे टॉर्क भी ज्यादा देखने को मिल जाता है ।

4. Combustion - 

डीजल फ्यूल का कंबशन यानी जलना पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा जल्दी कंप्लीट होता है जिसके कारण पिस्टन को ऊपर से नीचे जाने में ज्यादा समय मिल पाता है और इसी ज्यादा समय के कारण हमें डीजल इंजनों से ज्यादा पावर आउटपुट मिल पाता है ।

तो दोस्तों यह थे कुछ मुख्य कारण जो कि डीजल इंजन मे टॉर्क को ज्यादा प्रोड्यूस करने में मदद करते हैं । उम्मीद है दोस्तों आपको यह छोटी सी जानकारी अच्छी लगी होगी । फिर भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का कोई सवाल या सुझाव हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं । धन्यवाद ।


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