Rear Engine Car vs Mid Engine Car vs Front Engine Car - इन तीनो टाइप के कारो में क्या - क्या अंतर होते है ?

Rear Engine Car vs Mid Engine Car vs Front Engine Car

आपको पूरी दुनिया में लगभग तीन टाइप के ही कार देखने को मिलेगा ।

  • 1. Rear Engine car
  • 2. Mid Engine car
  • 3. Front Engine car

आइए हम समझते हैं कि इन इंजनों को इस प्रकार आगे, पीछे बीच में अरेंज करने से गाड़ी को क्या एडवांटेज और क्या डिसएडवांटेज मिलती है ?

1. Rear Engine - 

ऐसी गाड़ियां जो डिजाइन में कॉम्पैक्ट व छोटी होती हैं ऐसी गाड़ियों में अधिकतर rear engine यानी इंजन को पीछे की तरफ लगाया जाता है । जैसे उदाहरण के लिए आप टाटा नैनो को देख सकते हैं । इसका इंजन rear exel line यानी पिछले चक्के के ठीक ऊपर लगाया जाता है ।

■ Advantage - 

इस तरह के इंजन से हमें एडवांटेज यह मिल जाता है कि इंजन से डायरेक्ट पावर पिछले चक्को तक पहुंच जाता है । इसके अलावा ऐसे इंजनों में प्रोपेलर शाफ्ट की जरूरत नहीं होती क्योंकि इसका डिफरेंशियल ट्रांसमिशन के साथ से सीधा मर्ज हो जाता है । 

इसका दूसरा फायदा यह है कि इंजन का वेट front exel  पर ना होकर rear exel पर चला जाता है । इसी कारण rear exel पर गाड़ी के पूरे वेट का 65% वेट तक होता है । जिसके कारण यह रोड को पकड़ कर चलती हैं । 

इस प्रकार के रियर इंजनों वाले वाहनों में ब्रेकिंग के भी कुछ एडवांटेज हमें देखने को मिल जाते है । ऐसे वाहनों की ब्रेकिंग कंट्रोल बेहतर होती है । इनका स्टॉपिंग डिस्टेंस व स्टॉपिंग टाइम कम होता है यानी कि ब्रेक अप्लाई करने के तुरंत बाद ही गाड़ी रुक जाती है ।

■ Disadvantage - 

पर जहां इसके कुछ एडवांटेज हैं तो इसके कुछ डिस्ट एडवांटेज भी हमने देखने को मिलते हैं । ऐसे गाड़ियों को स्पीड में चलाते समय गाड़ी को हल्के मोड़ने पर भी ज्यादा मुड़ जाने का खतरा यानी कि ओवर स्टीयरिंग का खतरा बना रहता है ।

2. Mid Engine - 

ऐसे गाड़ियों का इंजन फ्रंट एक्सेल और रियर एक्सेल के बीच होता है यानी कि अगले चक्के और पिछले चक्के के बीच मौजूद होता है । अधिकतर गाड़ियों में mid इंजनों का एग्जैक्ट लोकेशन ड्राइवर की सीट के ठीक पीछे की ओर लोकेट रहता है ।

■ Advantage - 

ऐसे इंजनों की एडवांटेजेस की बात की जाए तो इस प्रकार के इंजनों वाले गाड़ियों में गाड़ी की स्टेबिलिटी बेहतर होती है क्योंकि गाड़ी का सबसे भारी कंपोनेंट इंजन होता है और अगर इसे बीच में रखा जाए तो ऐसे में इंजन का भार चारों चक्कों पर बराबर - बराबर बट जाता है जिसकी वजह से हाई स्पीड में भी ब्रेक लगाने पर गाड़ी स्मूथली रुक पाती है । 

इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि इन तीनों टाइप के इंजनों में सबसे बेहतर हैंडलिंग मिड इंजन वाले गाड़ियों में ही देखने को मिलता है । इस तरह के इंजनों में पावर का डिस्ट्रीब्यूशन पिछले चक्को में डायरेक्ट होता है इसलिए इसे अधिकतर स्पोर्ट्स कारों में उपयोग में लाया जाता है ।

■ Disadvantage - 

मिड इंजन वाले गाड़ियों की डिश-एडवांटेज के विषय में अगर हम बात करें तो इसमें सबसे बड़ा डिश-एडवांटेज गाड़ी की सीटिंग कैपेसिटी को लेकर होती है । ऐसे गाड़ियों में सीट के लिए जगह नहीं होती । अतः ऐसे गाड़ियों में अधिकतम 2 सीटों की ही व्यवस्था हो पाती है । 

दूसरा सबसे बड़ा डिसएडवांटेज हमें यह मिलता है कि अगर बाई चांस ओवर स्पीड में गाड़ी को मोड़ते समय ब्रेक अप्लाई किया जाए तो ऐसे में गाड़ी का असंतुलित होकर spin ( गोल-गोल घूमना ) होने का खतरा बढ़ जाता है, फिर इसे आप चाहकर भी कंट्रोल नहीं कर सकते । इसके स्पिन होने का सबसे बड़ा रीजन सेंटर आफ ग्रेविटी है जो कि गाड़ी में इंजन को बीच में रखने के कारण होता है ।

3. Front Engine - 

दुनिया में लगभग 98% गाड़ियों के इंजन फ्रंट में होते हैं । 

■ Advantage - 

फ्रंट इंजन वाले गाड़ियों की एडवांटेज के विषय में बात करें तो ऐसे गाड़ियों में स्पीड के समय ट्रेक्शन व हैंडलिंग कंट्रोल बेहतर होता है । इंजन आगे की ओर होने के कारण इंजन की कूलिंग भी बेहतर होती है । इसके अगर सबसे बड़े एडवांटेज की बात करें तो फ्रंट इंजन वाले गाड़ियों में चाहे गाड़ी का डिजाइन कैसा भी हो सीटिंग की किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होती ।

■ Disadvantage - 

हाई स्पीड में under steering का प्रॉब्लम आता है, इसके साथ ही हाई स्पीड में ट्रेक्शन लूज होने का खतरा भी होता है । इसी कारण आपने देखा होगा कि स्पोर्ट्स गाड़ियों में कभी भी फ्रंट इंजनों का उपयोग नहीं किया जाता ।

तो दोस्तों यह थे कुछ बेसिक्स अंतर इन तीनों टाइप के इंजनों के बारे में । उम्मीद है दोस्तों आपको जो छोटी सी जानकारी अच्छी लगी होगी । अगर आपके मन में किसी प्रकार का कोई सवाल या सुझाव हो तो आप हमें कमेंट करके पूछ सकते हैं । धन्यवाद ।

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