विद्युत मोटर को कनेक्शन करने की अलग - अलग विधियाँ क्या हैं ?

विद्युत मोटर को कनेक्शन करने की अलग - अलग विधियाँ क्या हैं ? 

दोस्तों हम अपने घरों में विद्युत मोटर का उपयोग तो करते ही हैं । आज हमारे बहुत सारे काम आज इन्हें मोटरों के बदौलत सुलभ हो पाता है । हमारे घरों में उपयोग होने वाले अधिकतर मोटर एक फेज यानी करीब 220v से 250v के अंदर ही चलते हैं । 

पर क्या आपको पता है कि कुछ मोटर जो कि उद्योगों इत्यादि में भारी कार्यों के करने के लिए बने होते हैं तथा यह नॉर्मल 220v की जगह 440 वोल्ट में संचालित होते हैं । इन मोटर्स को संचालित करने के लिए हमें 3 फ़ेजो की जरूरत होती है । और इन्हीं फ़ेजो को व्यवस्थित क्रम में कनेक्शन करके मोटर को चलाया जाता है ।

अब यहां आप यह सोच सकते हैं कि व्यवस्थित क्रम यानी क्या ? दरअसल दोस्तों इन मोटर्स का कनेक्शन मुख्यतः दो विधि द्वारा किया जा सकता है । पहला है स्टार कनेक्शन, दूसरा है डेल्टा कनेक्शन

चलिए दोस्तों हम बारी-बारी से इन कनेक्शन को समझने की कोशिश करते हैं । सबसे पहले हम स्टार कनेक्शन को समझते हैं ।

■ Star Connection Method -

जैसा कि हम जानते हैं कि इन मोटरों में फ़ेजो को जोड़ने के लिए 6 टर्मिनल यानी 6 पॉइंट दिए जाते हैं । जैसा कि आप चित्र में देख सकते हैं । 

electric motor points
electric motor points

स्टार कनेक्शन करने की विधि में हम मोटर के ऊपर वाले तीनों पॉइंट्स को आपस में जोड़ देते हैं तथा नीचे के तीनों पॉइंट्स को अलग-अलग फ़ेजो के मुताबित क्रम बाई क्रम जोड़ देते हैं । इस कनेक्शन की खास बात यह है कि इस कनेक्शन में मोटर के हर वाइंडिंग के अंदर 220v ही जाता है ।

star connection method
star connection method

दोस्तों अगर हम मोटर की वाइंडिंग ( मोटर के अंदर तांबे तार से बने गुच्छे ) के बारे में बात करें तो मुख्यतः हर मोटर में तीन वाइंडिंग होते हैं । यह मोटर के अंदर जोड़ो में होते है यानी हर वाइंडिंग के दो गुच्छे, और हर वाइंडिंग का एक स्टार्ट प्वाइंट होता है तथा एक एंड पॉइंट होता है । आप चित्र देखकर यह समझ सकते हैं । 

3 phase motor vanding
3 phase motor vanding

चित्र में आप लाल, हरा तथा नीले रंग के तारों के क्वाइलों के गुच्छों को देख सकते हैं । तथा हर एक वाइंडिंग के स्टार्ट और एंड पॉइंटस को भी देख सकते हैं ।

यहां एक चीज और ध्यान देने वाली बात यह है कि यही वाइंडिंगो के गुच्छे का स्टार्ट प्वाइंट और एंड पॉइंट ही हमें मोटर के ऊपर हमें 6 पॉइंट या टर्मिनल के रूप में दिखाई देते हैं ।

अब हम डेल्टा कनेक्शन की विधि देखते हैं -

■ Delta Connection Method -

इस कनेक्शन विधि में हम मोटर के ऊपर के तीनों पॉइंट्स को एक साथ ना जोड़कर, ऊपर वाले प्रत्येक पॉइंट को नीचे वाले पॉइंट के साथ जोड़ देते हैं । तथा नीचे वाले प्रत्येक पॉइंट्स को क्रमश : एक - एक फेज़ से जोड़ दिया जाता है । जैसा की चित्र में दिखाया गया है ।

delta connection method
delta connection method

अर्थात इसका मतलब यह हुआ कि डेल्टा कनेक्शन में मोटर के प्रत्येक वाइंडिंग के लिए दो फ़ेजो से करंट जाता है । इसलिए इसमें मोटर के अंदर बनने वाले मैग्नेटिक फील्ड, स्टार कनेक्शन से बनने वाले मैग्नेटिक फील्ड से ज्यादा हार्ड होता है । इस कनेक्शन विधि में मोटर के हर वाइंडिंग के अंदर 440 वोल्ट जाता है ।

अब हम यह जानते हैं कि हमें स्टार कनेक्शन और डेल्टा कनेक्शन कब और क्यों करना चाहिए ?

दोस्तों जैसा कि अब हमें यह पता है कि डेल्टा कनेक्शन में मैग्नेटिक फील्ड स्टार कनेक्शन के मुकाबले ज्यादा मजबूत बनता है तो ऐसे में अगर आप डेल्टा कनेक्शन वाले मोटर को कम लोड में चलाएंगे तो इससे मोटर की एफिशिएंसी कम होते जाती है अर्थात इसका मतलब यह हुआ कि इससे आपका मोटर जल्दी खराब हो सकता है । डेल्टा कनेक्शन वाले मोटर को चलाने के लिए आपको पूरी मोटर की क्षमता का कम से कम 70 से 75% तक का लोड उससे जुड़ा होना चाहिए ।

और वही अगर हम स्टार कनेक्शन की बात करें तो स्टार कनेक्शन में सिंगल - सिंगल फेज़ होने के कारण मैग्नेटिक फील्ड इतना स्ट्रांग नहीं बनता । अतः आप स्टार कनेक्शन वाले मोटर को उसकी पूरी क्षमता का 20 से 25% लोड तक भी बड़े आराम से चला सकते हैं । कम लोड के लिए यह कनेक्शन विधि बहुत ही कारगर है ।

तो दोस्तों यह थी स्टार कनेक्शन और डेल्टा कनेक्शन की पूरी जानकारी, हमने आपको संक्षिप्त तथा सरल शब्दों में पूरी जानकारी देने की कोशिश की है । उम्मीद है कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी । अगर आपके मन में किसी प्रकार कोई सवाल या सुझाव हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं , धन्यवाद ।


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